
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के हरोगेरी ग्राम पंचायत में बुधवार को मजदूरों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें तालुक पंचायत के कार्यकारी अधिकारी विश्वनाथ होसामनी ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी और इसके लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
इस बैठक में विश्वनाथ होसामनी ने कहा कि गर्मियों के मौसम में गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को स्थायी और सुनिश्चित रोजगार देने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मजदूरों को उनकी ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर ही काम उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें रोजगार के लिए दूर न जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी मजदूर बेरोजगार न रहे और उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार काम मिलता रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र मजदूरों को योजना के तहत काम उपलब्ध कराया जाए और इसमें किसी प्रकार की देरी या लापरवाही न हो।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी राशि केवल दैनिक खर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मजदूर अपने परिवार के भविष्य के लिए भी उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर इस पैसे का उपयोग अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और खेती से जुड़े खर्चों जैसे बीज और खाद की खरीद में कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बारिश के बाद जब कृषि कार्य शुरू होंगे, तब तक मजदूरों को नरेगा के अंतर्गत लगातार काम दिया जाएगा, ताकि उनकी आय स्थिर बनी रहे। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे मौसम आधारित रोजगार की अनिश्चितता से बच सकेंगे।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि इससे पलायन को भी रोका जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि नरेगा योजना के तहत गांव में ही छोटे-छोटे विकास कार्य जैसे सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब खुदाई और अन्य सार्वजनिक कार्य कराए जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिलता है और गांव का विकास भी होता है।
विश्वनाथ होसामनी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी पात्र मजदूर को योजना से वंचित न रखा जाए और सभी कार्य पारदर्शिता के साथ किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि नरेगा योजना उनके लिए एक महत्वपूर्ण सहारा है, खासकर उस समय जब कृषि कार्य नहीं होते। उनका कहना है कि इस योजना से उन्हें नियमित आय मिलती है, जिससे उनके परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है।
फिलहाल, प्रशासन का कहना है कि योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी और अधिक से अधिक मजदूरों को इसका लाभ दिलाया जाएगा।





